Sunday, February 8, 2026

आया सुंदर भोर

,       आया सुन्दर भोर 

          उठ  भाई अब 
          आलस्य त्याग 
          मिटा   मन  के
          सारे   अवसाद 
     आया प्यारा सुंदर भोर
   सूर्य-किरण फैली चहुँ ओर 
  सभी जीव का मन विहसता
 खुशियों से तन - मन हुलसता
  उड़ी चिरैया भर मन उल्लास
    चहक कर करती परिहास
         खुश कर मन उदास

3 comments:

  1. आया प्रभात और आयी भोर

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 9 फ़रवरी 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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