, आया सुन्दर भोर
उठ भाई अब
आलस्य त्याग
मिटा मन के
सारे अवसाद
आया प्यारा सुंदर भोर
सूर्य-किरण फैली चहुँ ओर
सभी जीव का मन विहसता
खुशियों से तन - मन हुलसता
उड़ी चिरैया भर मन उल्लास
चहक कर करती परिहास
खुश कर मन उदास
सुंदर
ReplyDeleteआया प्रभात और आयी भोर
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 9 फ़रवरी 2026 को लिंक की गयी है....
ReplyDeletehttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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