माँ शारदे भवानी इतनी कृपा तू करना।
मुझ मूढ के हृदय से अज्ञानता को हरना। ।
तेरे चरण में माता हम शीश हैं नवाते।
कर जोड़कर विनीत हो विनती सदा ही गाते। ।
विद्या ददाति माता !हमको सुघड़ बना दो।
सन्मार्ग पर भी चलना, हमको तू माँ सिखा दो।
छोटा बड़ा सभी माँ हर काम को करें हम ।
विद्या के ashma में उड़ान भी भरें हम।।
आशीष तुम दो माता, जो कामना करें हम।
जो दीन और दुखी हो, उन सबका दुःख हरे हम ।।
आकाश से भी ऊंचा, मन भाव हो हमारा।
गंगा बहे हृदय में, हों प्रेम की ही धारा। ।
मस्तक सदा हो ऊंचा, वरदान मुझको देना ।
किसी का न दिल दिखाऊ, सच्चा विचार देना। ।
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