Sunday, December 14, 2025

मौन

मैं             मैं मौन
             मौन     हूँ 
         मौन  रहती  हूँ 
     मौन रहना पङता है
   मौन रहने की आदत है
 पहले नहीं,अब हो गई  है
लेकिन अगर मेरा यह मौन
जिस दिन मुखर हो जाएगा
 तो न जाने कितने ही राज 
   खुल कर आएँगे  सामने 
    जो अभी तिलिस्म   के
       भीतर गुनहगार   है
         मानो गुमशुदा   है
          चाहे गुमनाम  है
            या गुमसुम  है
              गुमराह   है
                गौन    है
                 गुम   है

कौन

1          कौन
         कौन   हो
       तुम कौन हो
     बताते क्यों नहीं 
    भला क्यों मौन हो
  कहाँ से  आये हो तुम
 कहाँ  है  तुमको   जाना 
कहाँ  है  तुम्हारा घर-बार
 क्या  है  पता   ठिकाना
  आज  तक अभी  तक
      सिर्फ  और  सिर्फ 
        दूसरों  के  नाम 
           से  पहचान 
            है तुम्हारी
               फिर 
              इतनी 
          अकङ  क्यों
         चाल  में ऐठन
       बोली में तीखापन 
    नजरों में तीर-सी चुभन

Monday, December 8, 2025

गणेश वंदना (विधाता छंद)

गणेश वंदना (विधाता छंद)

गजानन जी पधारो तुम, मुझे  विश्वास  तुम  पर है।
अभी आजा हमारे घर, न तुझ बिन शोभता घर है।।

भला  किसको बुलाऊंँ मैं, मुझे  बस आस है  तेरी।
जरा आकर  नजर फेरो, करो  ना आज  तुम देरी।।

लगाकर कूश का आसन, बिठाऊँ आपको उसपर।
नहाकर  साफ  जल से  मैं, सजाकर रेशमी चादर।।

लगाऊंँ  भाल  पर  चंदन, चढ़ाऊँ  पुष्प की  माला।
लगाऊंँ  भोग  लड्डू  का, पिलाऊँ  दूध का  प्याला।।

चरण  तेरे   पडूँ   देवा, जरा  मुझ  पर दया करना।
अगर पथ में रुकावट हो,सुनो उसको अभी हरना।।

बना दो आज बिगड़ी तुम, मिटा दो वेदना मन की।
पकड़  पतवार  हाथों से, उबारो  नाव  जीवन की।।

मुझे  आशीष  दो  इतना, सभी   पूरे मनोरथ  हों।
मुझे  मंजिल  मिले  मेरी, रुके  कोई नहीं  पथ हों।।

मुझे  वरदान  दो  इतना, करूँ सबकी  भलाई  मैं।
कभी भूलूं  नहीं  करना, भले - जन की बड़ाई मैं।।

               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, December 7, 2025

मौन

मैं               मैं
               मौन
             मौन  हूँ 
         मौन रहती हूँ 
     मौन रहना पङता है
   मौन रहने की आदत है
 पहले नहीं,अब हो गई  है
लेकिन अगर मेरा यह मौन
जिस दिन मुखर हो जाएगा
 तो न जाने कितने ही राज 
   खुल कर आएँगे सामने 
     जो अभी तिलिस्म के
        भीतर गुनहगार है
          मानो गुमशुदा है
           चाहे गुमनाम है
             या गुमसुम है
               गुमराह है
                 गौन  है
                  गुम है

Saturday, November 1, 2025

कृष्ण कन्हैया

मटक-मटक भटक चलत कृष्ण कन्हैया।
विजन-विजन धाव चराबे यशोदा की गैया।
धर अधर पर बजाबे बाँसुरी  प्यारी।
मधुर-मधुर धुन धनक छेङे मुरारी।
झनक-झनक पैजनी बजत नाचे कन्हैया। 
रिझत-रिझत मन ही हंसत यशोमती मैया।
थपक-थपक थपकी देवत कान्हा सुलाबे।
हलस-हलस विहस-विहस मधुर धुन गाबे।
झपक झपक झपक ऊंघत मातु अति भोरी।
रहस रहस रहस विहस गाबत लोरी।
लपक-लपक चलत कृष्ण निंदिया न आबे।
झटक झटक  चल घूमत द्वार पर  धाबे।
 छमक-छमक छमक कान्हा हाथ छुङाबे।



Friday, October 31, 2025

अम्बे माँ की चुनरिया

अम्बे माँ की चुनरिया

लहर -लहर लहराए रे, अम्बे माँ की चुनरिया।
भक्त जनों को भाए रे,अम्बे माँ की चुनरिया।

मैया की चुनरी में गोटा लगा है।हाँ गोटा लगा है।
मोती की लरियांँ सजाओ रे अम्बे माँ.........

मैया की चुनरी में सितारा जड़ा है,हाँ सितारा जड़ा है।
दवका भी उसमें बिठाओ रे, अम्बे माँ........

मैया की चुनरी में मोती लगा है,हाँ मोती लगा है,
लटकन भी उसमें लगाओ रे अम्बे माँ ......
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मैया की चुनरी में जरी लगा है,हाँ जरी लगा है।
धागा से फूल बनाओ रे अम्बे माँ की.....

मैया की चुनरी में घंटी लगा है,हाँ घंटी लगा है।
घुंघरू भी उसमें लगाओ रे, अम्बे माँ.........

मैया की चुनरी में प्रेम भरा है, हाँ प्रेम भरा है।
ममता का मिलता छांँव रे, अम्बे माँ............

Sunday, October 26, 2025

मांँ शारदे वंदन

मांँ शारदे वंदन 

हे ज्ञान दायिनी मांँ सरस्वती,नमन बारम्बार है।
नमन   बारम्बार   तुझको,   नमन बारम्बार है।
नमन बारम्बार तुमको...................
ज्ञान का वरदान दो माँ! हस्त पुस्तक धारिणी।
गीत  दो,  संगीत दो, हे  वाणी   वीणावादिनी।
हम सब तेरी संतान माता,  आये तेरे  द्वार  हैं।
नमन बारम्बार तुमको ...................
मन में स्वच्छ विचार दो, हे स्वेत  कमलासना।
बुद्धि-बल को निखार दो, हे  मातु   पद्मासना।
श्रद्धा सुमन चढाने आये, चढाने  आये हार हैं।
नमन बारम्बार तुमको...................
हे महाश्वेता शारदा, मेरी जड़मति को दूर कर। 
मेरे मन में चेतना की, सब  मति  भरपूर  भर।
तेरा - ही आशीष  से,  सुंदर   मेरा  संसार  है।
नमन बारम्बार तुमको....................
सब  कलुष  हर मेरे मन का, हे  श्री वागेश्वरी।
मेरा   मन  निर्मल  बना  दे,  हे  माता   ईश्वरी।
तेरे चरणों  से जुङा सब, मेरे  दिल का तार है।
नमन बारम्बार तुमको..........