मन साफ नहीं,तन साफ नहीं।
जब कोई नही तो आप नही।
पटक-पटक कर कपड़े धोए,
गंध-मैल हटाए दूर।
जो अपने मनमा को धोते,
हो जाते बेकसूर।
रगड़-रगड़ कर घर को धोया,
कूङा-कचरा साफ किया।
मन-मंदिर को साफ करन में,
कोई झटपट नहीं रहा।
घास-फूस को काट-छांट कर,
आँगन की तूने की सफाई।
पर मनुवा को साफ करन में,
तूने क्यों इतनी देर लगाई।
लिप-पोतकर ऊंची कोठी पर,
सुन्दर रंग से किया रंगाई।
वैसे मन को सुन्दर रंग देने में,
बोलो क्यो कर किये ढिलाई।
काले तन को साफ करन को,
हल्दी-अबटन बहुत लगाये।
पर मनमा को साफ करन में,
कोई झटपट नहीं दिखाये।
सुजाता प्रिय समृद्धि
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