नटखट मोहन-श्याम
बड़ा नटखट मोहन-श्याम सखी-
बड़ा नटखट......
तंग करता आठो याम सखी!
बड़ा नटखट.......
जब पनघट पर मैं जाती हूँ,
मेरे पीछे-पीछे आता है।
झकझोर मेरी मटकी को,
सारे जल को गिराता है।
मटकी लेता थाम सखी!
तंग करता........
जब मधुवन में मैं जाती हूँ,
मेरे पीछे-पीछे आता है।
बेली-चमेली की कलियाँ,
तोङ मुझ पर गिराता है।
हर दिन उसका काम सखी!
तंग करता.................
जब बाग-बगीचे जाती हूँ,
गैया को चराने आता है।
ठोक-पीटकर लकुटी को,
मुझे अपनी ओर रिझाता है,
भोर से लेकर शाम सखी!
तंग करता...................
बैठ कदम की डाली पर,
वह वंशी मधुर बजाता है।
राधा-राधा कह वंशी की,
धुन में वह मुझे बुलाता है।
करता है मुझे बदनाम सखी!
तंग करता....................
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