संगठन में शक्ति
एक किसान के थे चार बेटे ।
चारो मिलकर खूब झगड़ते ।
किसान ने उनको समझाया।
पर बेटों को समझ न आया।
किसान ने एक योजना बनाई।
उनसे आठ लड़कियाँ मंगाई।
चार को साथ रस्सी से बंधा।
चार को अलग - अलग रखा।
प्रत्येक पुत्र को पास बुलाया।
बँधी लकड़ियों को तोड़बाया।
पर लकड़ियां उनसे नहीं टूटी।
मिलकर पाई थी मजबूती।
एक - एक लकड़ी पकड़ाया।
उनको उन चारो से तुड़वाया।
टूटी वह बिना लगाए जोर।
अकेली लकड़ी थी कमजोर।
तब लड़कों को समझ आया।
सब आपस में हाथ मिलाया।
बोले अब हम सब नहीं लड़ेंगे।
हम-सब मिल- जुलकर रहेंगे।
संगठन में शक्ति बहुत है भाई।
है बँधी लकड़ियों-सी सच्चाई।
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 5 अप्रैल 2026 को लिंक की गयी है....
ReplyDeletehttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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मेरी रचना को पाँच लिंकo के आनंद पर साझा करने हेतु सादर धन्यवाद भाई।
Deleteपुरानी लोककथा को कविता में ढालकर बहुत अच्छा किया है आपने। अंतिम पंक्ति में एक अशुद्धि है। सुधार लीजिए।
ReplyDeleteJi सादर धन्यवाद
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