S तुम से मिल कर
तुम से मिल कर
ऐसा लगता है कि
कुछ खोया हुआ
पा लिया है हम ने
उस रास्ते की याद आई
जहाँ कभी हम साथ चलते थे
गलबहियाँ डाल,पीठ पर बस्ते लिए
नन्हें कदमों से मंजिल की दूरियाँ नापते
संजीदगी -से रास्ते की धूल उड़ाते हुए
चलते चले जाते थे, बढ़ते जाते थे,
तब हमारे मक़सद एक होते थे,
और हमारे उद्देश्य एक होते थे,
सभी सपने भी एक होते थे,
पर आज हमारा मिलना
एक सपने से कम नहीं
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
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