1 कौन
कौन हो
तुम कौन हो
बताते क्यों नहीं
भला क्यों मौन हो
कहाँ से आये हो तुम
कहाँ है तुमको जाना
कहाँ है तुम्हारा घर-बार
क्या है पता ठिकाना
आज तक अभी तक
सिर्फ और सिर्फ
दूसरों के नाम
से पहचान
है तुम्हारी
फिर
इतनी
अकङ क्यों
चाल में ऐठन
बोली में तीखापन
नजरों में तीर-सी चुभन
No comments:
Post a Comment